अमेरिका का कुबूलनामा: ‘भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का पेट भरते हैं ‘भारतीय किसान’

यकीन मानिए…हमारी इस खास रिपोर्ट को पढ़कर आपका दिल गदगद हो जाएगा. कभी पूरी दुनिया में अपनी बदहाली के लिए विख्यात रहने वाले हमारे किसान भाई अब पूरी दुनिया की उम्मीदें बनकर उभर रहे हैं. कभी खुद अभावों और गुरबत में जीने वाले हमारे किसान भाई अब दूसरों के अभावों की पूर्ति करने की क्षमता अपने अंदर समेट रहे हैं. बेशक, इस बात को कतई खारिज नहीं किया जा सकता है कि अभी हमारे किसानों को और समृद्ध होने की जरूरत है, लेकिन इस बात को भी नहीं नकारा जा सकता है कि अब हमारे किसान भाइयों की बदहाली आहिस्ता-आहिस्ता गुजरे जमाने की इबारत बनती जा रही है. अब तो भारतीय किसान ‘वैश्विक अन्नदाता’ बनकर उभर रहे हैं. पूरी दुनिया की उम्मीदें अब अगर किसी पर टिकी हुई हैं, तो वो भारतीय किसान हैं. मौजूदा वक्त में पूरी दुनिया में गेहूं की कमी को पूरा करने के लिए भारत इस वर्ष 20 लाख टन गेहूं निर्यात कर सकता है. अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) इससे पहले 2019-20 में भारत ने महज 5 लाख गेहूं का निर्यात किया था, लेकिन आज आप देख सकते है कि यह आंकड़ा 15 लाख अधिक हो चुका है. हालांकि, भारत में गेहूं का बकाया स्टॉक 247 लाख टन था. वहीं, अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) के अनुसार, विगत दिनों भारत द्वारा निर्यात किए जा रहे गेहूं की मात्रा में 2 लाख टन की बढ़ोतरी हुई है. वैश्विक आपूर्ति 350 लाख टन से बढ़कर 107.71 लाख टन था. इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि गेहूं की वैश्विक खपत में भी बढ़ोतरी हुई है

इस वजह से बढ़ रही गेहूं की मांग

इसके साथ ही वैश्विक स्तर के परिदृश्य पर अगर गौर फरमाएं तो गेहूं की मांग के बढ़ने की मुख्य वजह चीन को माना जा रहा है, चूंकी चीन की तरफ गेहूं की मांग में इजाफा दर्ज किया जा रहा है. वहीं, वैश्विक निर्यात के साथ-साथ भारत अपनी घरेलू जरूरतों की पूर्ति करने में जुटा हुआ है. भारत इसे लेकर संतुलन की स्थिति में आना चाहता है, जिसको ध्यान में रखते हुए इस बार गेहूं के उत्पादन को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि वैश्विक जरूरतों के साथ-साथ घरेलू जरूरतों को भी पूरा किया जा सके. इस दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार 1 अप्रैल 2021 से गेहूं खरीद की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है. वहीं, हरियाणा सरकार ने इस बार 80 लाख मिट्रिक टन गेहूं की खऱीद का लक्ष्य निर्धारित किया है.  

MSP पर गेहूं, सरसों और चना समेत इन फसलों को बेचने के लिए जल्द करें ये काम

हरियाणा के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. दरअसल, राज्य में आने वाली 1 अप्रैल से गेहूं, चना, सरसों, दाल, सूरजमुखी और जौ की सरकारी खरीद शुरू हो जाएगी. ऐसे में जो किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी फसलों को बेचना चाहते हैं, तो उनके लिए सबसे पहले एक ज़रूरी काम करना होगा, ताकि 1 अप्रैल से सरकारी खरीद शुरू होने के बाद किसी तरह की परेशानी न हो. आइए आपको इस संबंध में पूरी जानकारी देते हैं-

करना होगा ये काम

किसानों को फसलों की सरकारी खरीद के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा (Meri Fasal Mera Byora) पोर्टल https://fasal.haryana.gov.in/ पर रजिस्ट्रेशन करना होगा. अगर किसानों ने ऐसा नहीं किया, तो उनकी फसलों की बिक्री नहीं हो पाएगी.

ज़रूरी दस्तावेज़

• अपना बैंक खाता
• खेती की जमीन का सही विवरण
• ऐच्छिक मंडी एवं फसल बेचने की अवधि आदि को अपलोड करवाना होगा.

इस प्रक्रिया को करने के बाद किसानों को फसल बेचने में कोई परेशानी नहीं आती है. अगर फिर भी किसी तरह की शिकायत है, तो किसान जिला स्तरीय कमेटी के समक्ष अपनी समस्या रख सकते हैं.

दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसान संगठन सबसे ज्यादा आवाज हरियाणा और पंजाब में ही उठा रहे हैं. इस मसले पर किसानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, इसलिए राज्य सरकार चाहती है कि रबी मार्केटिंग सीजन (RMS) 2021-22 में किसी तरह की परेशानी न हो. जानकारी के लिए बता दें कि अब तक राज्य के 7.25 लाख किसानों ने गेहूं की बिक्री के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रखा है.

80 लाख मिट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य

इस साल 80 लाख मिट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया गया है. बता दें कि आरएमएस 2020-21 में कुल गेहूं उत्पादन का 60.3 प्रतिशत यानी 74 लाख मिट्रिक टन की सरकारी खरीद हुई थी. इसके अलावा पहली बार जौ की एमएसपी पर खरीद की जा रही है. इसके लिए 7 मंडियां भी निर्धारित की गई हैं.

48 घंटे के अंदर मिलेगा पैसा

किसानों को मंडी में अपनी फसल बेचने के बाद जे-फार्म मिलता है, जिसमें बिक्री का ब्यौरा रहता है. बताया जा रहा है कि यह फार्म कटने के 48 घंटे के अंदर फसल-बिक्री की कीमत उसके खुद के बैंक खाते में या आढ़ती के खाते में भेज दी जाएगी.

ग्वार फली से अधिकतम उपज प्राप्त करने की विधि

जलवायु और भूमि (Climate)

ग्वार फली गर्म जलवायु की सब्जी है जिसके लिए सूखा और गर्म मौसम बेहतर होता है. जबकि ज्यादा वर्षा तथा ठण्ड वाले क्षेत्र इसके लिए नुकसानदायक होते हैं. इसकी खेती के लिए 300-350 मिलीमीटर औसत वर्षा उपयुक्त होती है. बीजों के जल्दी अंकुरण तथा पौधों में जड़ों का उचित विकास हेतु मिट्टी का ताप 25-30 डिग्री सेंटीग्रेट होना आवश्यक है. ग्वार लगभग सभी प्रकार की मृदाओं में इसकी खेती की जा सकती है. परन्तु बुलई दोमट मिट्टी और उचित जल निकास तथा कार्बनिक पदार्थ से भरपूर मृदाओं में इसकी खेती के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है. हल्की क्षारीय व लवणीय भूमि में जिसका ph मान 7.5-8 तक हो वहाँ भी ग्वार फली की खेती की जा सकती है.

ग्वार फली से अधिकतम उपज प्राप्त करने की विधि

जलवायु और भूमि (Climate)

ग्वार फली गर्म जलवायु की सब्जी है जिसके लिए सूखा और गर्म मौसम बेहतर होता है. जबकि ज्यादा वर्षा तथा ठण्ड वाले क्षेत्र इसके लिए नुकसानदायक होते हैं. इसकी खेती के लिए 300-350 मिलीमीटर औसत वर्षा उपयुक्त होती है. बीजों के जल्दी अंकुरण तथा पौधों में जड़ों का उचित विकास हेतु मिट्टी का ताप 25-30 डिग्री सेंटीग्रेट होना आवश्यक है. ग्वार लगभग सभी प्रकार की मृदाओं में इसकी खेती की जा सकती है. परन्तु बुलई दोमट मिट्टी और उचित जल निकास तथा कार्बनिक पदार्थ से भरपूर मृदाओं में इसकी खेती के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है. हल्की क्षारीय व लवणीय भूमि में जिसका ph मान 7.5-8 तक हो वहाँ भी ग्वार फली की खेती की जा सकती है.

उन्नत किस्में (Advanced varieties)

पूसा मौसमी, पूसा सदाबहार, पूसा नवबहार, दुर्गा बहार, शरद बहार, एम-83, ए.एच.जी, गोमा मंजरी आदि सब्जी ग्वार फली की प्रमुख उन्नत किस्में हैं.

बुवाई का समय (Time of sowing)

ग्वार फली की जायद में फरवरी-मार्च तथा खरीफ में जून-जुलाई में बुवाई की जाती है.

खेत की तैयारी (Field preparation)

जायद की फसल के लिए दिसम्बर-जनवरी माह में जुताई कर खेत को खरपतवारों से मुक्त रखना चाहिए. इस समय खेत की जुताई करने से दिसम्बर माह में होने वाली मावठ (रबी में वर्षा) का पानी खेत में जमा रहता है. जो कि गर्मी की फसल के लिए लाभदायक रहता है. खरीफ ग्वार की फसल हेतु खेत में जुताई जून-जुलाई महीने में करते है तथा 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकर खेत में पाटा लगाकर तैयार कर लेवें.

बीज की मात्रा एव बीजोपचार (Seed rate and Seed treatment)

जायद मौसम में 20-25 किलोग्राम बीज जबकि खरीफ में 15-20 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई करें. बीज की बुवाई से पहले बीज को 1:30 घंटे तक स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के 500 मिली ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल में भिगोकर, छाया मे सुखाकर व 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलो बीज की दर से बुवाई के पहले उपचार करके बोना चाहिए. बीजों को 2-3 ग्राम राइबोजियम कल्चर प्रति किलो बीज की दर से भी उपचारित करने से 10-15 % तक नत्रजन की बचत होती है.

बुवाई की विधि (Method of sowing)

बीजों की बुवाई कतार में 45-60 सेमी की दूरी पर जबकि पौधे से पौधे की दूरी 20 सेमी रखना चाहिए.

खाद एवं उर्वरक (Manure and Fertilizer)

ग्वार फली की खेती के लिए 200 से 250 क्विंटल गोबर की सड़ी खाद, 25-30 किलोग्राम नाईट्रोजन, 40-50 किलोग्राम फोस्फोरस, 20 किलोग्राम सल्फर तथा 5 किलोग्राम जिंक प्रति हेक्टेयर की दर से भूमि में डालने से उत्पादन अच्छा होता है. गोबर की खाद को अंतिम जुताई से पहले समान रूप से खेत में बिखेर कर ही जुताई करनी चाहिए. नत्रजन की आधी मात्रा एवं अन्य उर्वरकों को खेत की अंतिम तैयारी के समय भूमि में डालना चाहिए. शेष नत्रजन की मात्रा 25-30 दिन बाद खडी फसल में देवें.

सिंचाई प्रबंधन (Irrigation management)

खरीफ फसल में समय पर वर्षा न होने पर आवश्यकता के अनुसार 2-3 सिंचाई करनी चाहिए. सब्जी वाली फसल में सिचाई का विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है. फूल आने के समय तथा फलियाँ बनने के समय भूमि में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए अन्यथा फलियों की पैदावार व गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है.
गर्मी की फसल में सिंचाई 7-10 दिन के नियमित अन्तराल में करनी चाहिए. सिंचाई हल्की व कम गहरी होनी चाहिए.बूँद-बूँद सिंचाई विधि से सिंर्चाइ करने से जल बचत के साथ अधिक उत्पादन प्राप्त होता है.

खरपतवार प्रबंधन (Weed management)

बुवाई 20-25 दिन तक खरपतवारों पर पूरी तरह से नियंत्रित रखें. एक से दो बार निराई-गुड़ाई कर खरपतवार निकालने से जड़ों में वायु संचार बढ़िया हो जाता है जो फसल के वृद्धि एवं विकास के लिए लाभदायक होती है या रासायनिक खरपतवारनाशी के रूप में पेन्डामिथालिन 3.0 लीटर को 500-600 लीटर पानी के घोल में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के 2 दिन के अन्दर छिड़काव करने से खरपतवारों की समस्याओं से बचा जा सकता है.

फलियों की तुड़ाई एवं उपज (Harvesting and yield of pods)

फलियों की तुड़ाई कोमल और पूर्ण विकसित अवस्था में करनी चाहिए. यह बुर्वाइ के 50-60 दिन में तोड़ने लायक हो जाती है. नर्म, कच्ची और हरी फलियों की तुड़ाई 4-5 दिन के अन्तराल से नियमित रूप में करें.
जायद में 50-60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर जबकि खरीफ में 100-120 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.

कीट एवं व्याधि प्रबन्धन (Plant Protection)

एन्थेक्नोज रोग: पत्तियों तथा फलियों पर भूरे रंग के धब्बे हो जाते हैं तथा किनारे लाल पड़ जाते हैं. रोग नियंत्रण के लिए बुवाई से पूर्व बीजोपचार थायरम या कैप्टान 2 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से करें. रोग ग्रसित पत्तियों व फलियों पर मेंकोजेब 2 ग्राम या कार्बोन्डाजिम 2 ग्राम प्रति लीटर का घोल बनाकर 7 से 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें.

चूर्णिल आसिता रोग: रोगी पौधे पर सफेद चूर्णी धब्बे दिखाई देने लगते है. इसके नियंत्रण के लिए घुलनशील गंधक की 2 मात्रा प्रति लीटर पानी या थियोफिनेट मिथाइल 2 ग्राम मात्रा का प्रति लीटर पानी के घोल का छिड्काव करें.

जीवाणु (अंगमारी): पतियों पर काले-भूरे धब्बे के रूप में दिखाई देने लगते है, जो बढ़कर पूरी पत्ती को ढक लेता है. इस बीमारी की रोकथाम के लिए बीजों को 50 डिग्री सेन्टीग्रेट गर्म पानी में 10 मिनट तक डालकर बुवाई करें या बीज को एक घण्टा 30 मिनट तक स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के 500 मिली ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल में भिगोकर, छाया में सुखाकर व 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलो बीज की दर से बुवाई पूर्व उपचार करें. रोग के लक्षण दिखाई देने पर कॉपर ओक्सिक्लोराइड़ 50 डबल्यूपी 500 ग्राम या कासुगमयसिन 3 एसएल 300 ग्राम प्रति एकड़ क्षेत्र में 200 लीटर पानी के साथ संपर्क करें.

जड़ गलनः पौधों की जड़ें भूरी व काली पड़कर गलने लगती है. बीजों को बुवाई से पहले कार्बोक्सिन 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. इसकी रोकथाम के लिए गर्मी में खेत की गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करे और उचित जलनिकास का प्रबंधन करें.

मोजेकः यह एक विषाणु जनित रोग है, जो सफेद मक्खी कीट से फैलता है. रोगग्रस्त पौधों को उखाड़ कर जला दे. इसके लिए रोगरोधी किस्मों का चयन करें. कीट नियंत्रण के लिए डायमिथोएट 30 ईसी 1.25 मिली लीटर दवा प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें.

चेपा/मोयला/सफेद मक्खीः यह कीट नई और कोमल पत्तियों का रस चूसकर पौधे की उपज को कम करते हैं. अतः पौधों की वृद्धि अवस्था के दौरान डायमिथोएट 30 ई.सी. 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें.

फली बेधक कीटः लटें फलियों में छेदकर उन्हें खाकर नुकसान पहुँचाती हैं. नियंत्रण के लिए एमामेक्टिन बेंजोइट 5 SG 100 ग्राम प्रति एकड़ पानी ए साथ स्प्रे कर दें. आवश्यकता होने पर 15 दिन के अन्तराल पर पुनः छिड़काव करें.

ग्वार फली को सूखाना(Drying guar pods)

ग्वार फली को सुखाकर वर्षभर सब्जी के रूप में काम में लिया जाता है. इसको सूर्य की रोशनी में खुले स्थान पर सुखा सकते है जिससे सूखी फलियों की गुणवत्ता एवं स्वाद खराब हो जाता है और ये जल्दी खराब होकर काली पड़ जाती है. खुले स्थान पर सुखाने से ग्वार फलियों में मिट्टी तथा अन्य जीवाणुओं का संक्रमण होता है. अतः उन्हें अच्छी तरह से साफ करके छाया में कपड़ें से ढककर सुखाना अच्छा रहता है. ग्वारफली को सुखाने से पहले उबलते हुए पानी में दो मिनिट डूबोकर रखे और बाद में किसी सुरक्षित स्थान पर छाया में सुखाने से उन्हें लम्बे समय तक स्वादिष्ट एवं सुरक्षित रखा जा सकता है. आजकल सौर शुष्क का भी इस्तेमाल किया जाता है. इसमें फलियाँ 2-4 दिन में कम समय में सूख जाती हैं और गुणवत्ता भी बनी रहती है. सूखी हुई फलियों को बाद में बाजार में बेचकर किसान र्भाइ बे-मौसम में भी लाभ कमाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं.

आलू की नई कुफरी संगम किस्म करेगी मालामाल, 100 दिन में मिलेगा फसल का अच्छा उत्पादन

धान की कटाई के साथ ही अधिकतर क्षेत्रों में आलू की बुवाई शुरू हो जाती है. मगर कई बार किसान मंहगा खाद बीज का उपयोग करते हैं, साथ ही मेहनत भी करते हैं, लेकिन फिर भी फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त नहीं कर पाते हैं.
बता दें कि आलू की खेती की शुरूआत खेत की तैयारी से लेकर बीज के चयन से होती है, इसलिए किसानों को शुरू से ही इस पर ध्यान देना चाहिए. इसी कड़ी में केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (Central Potato Research Institute/CPRI) के वैज्ञानिकों द्वारा आलू की एक नई किस्म विकसित की गई है. इस नई किस्म का नाम कुफरी संगम है, जो कि खाने में स्वादिष्ट है, साथ ही उत्पादन भी मिलता है.

आलू की नई कुफरी संगम किस्म

इस किस्म पर मेरठ के मोदीपुरम में लगभग 12 साल तक शोध का कार्य किया गया है. अखिल भारतीय स्तर पर इसका परीक्षण 14 केंद्रों पर मानकों पर खरा उतरा है. इसके बाद किसानों के लिए तैयार किया गया है. कृषि वैज्ञानिक की मानें, तो यह किस्म 100 दिनों में तैयार होने वाली है. इसके साथ ही उत्पादन के लिए भी अच्छी है इस किस्म में रोग प्रतिरोधी क्षमता अधिक होती है. इसमें पछेता झुलसा बीमारी को सहन करने की क्षमता अधिक होती है. खास बात यह है कि किसानों को परीक्षण से उत्पादित बीज दिया जा रहा है. यह किस्म कुफरी चिप्सोना, कुफरी बहार, फ्राइसोना से अधिक उत्पादन देगी. यह किस्म देश के 8 राज्यों के लिए खास उपयोगी मानी गई है. इसमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ हरियाणा और पंजाब का नाम शामिल है. इसकी बुवाई उत्तरी मैदान में अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में कर सकते हैं. इसके अलावा केंद्रीय मैदान में अक्टूबर से नवंबर के पहले पखवाड़े तक कर सकते हैं.

पीएम किसान योजना (PM Kisan Yojana) में बड़ा बदलाव, ज़रूर पढ़िए ये जानकारी

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम (PM Kisan Samman Nidhi scheme) में बड़ा बदलाव किया गया है. दरअसल, इसो योजना के पात्र किसानों को लाभ देने के लिए मोदी सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों में लाभार्थियों की लिस्ट डिस्प्ले करने का निर्देश दिया है.
यह काम राज्य सरकारों के लिए करना ज़रूरी है. इससे नकली किसान लाभ नहीं उठा पाएंगे. अभी लोगों को नहीं पता है कि उनके गांव में किन-किन खेती के लिए सरकारी मदद मिल रही है. मगर सरकार के नए फैसले से हर ग्रामीण को यह जानकारी होगी कि कौन-कौन लाभ उठा रहा है. इससे फर्जी लाभार्थियों की पहचान आसान हो जाएगी.
सरकार का प्रयास है कि इस तरह ग्रामीण ही एक दूसरे की पोल खोलने लग जाएंगे. इतना ही नहीं, इस योजना का सोशल ऑडिट (Social Audit) करवाने के भी निर्देश दिए गए हैं. इससे उन तमाम किसानों को सूची से बाहर किया जाएगा, जो कि योजना के पात्र नहीं हैं, लेकिन फिर भी सालाना 6 हजार रुपए ले रहे हैं. यह ऑडिट हल्का पटवारी और तहसीलदार के निर्देश पर गांव पंचायत (Gram panchayat) स्तर पर किया जाएगा. सरकार की ड्रीम स्कीम में फर्जीवाड़े की वजह से काफी सख्ती दिखाई जा रही है. अब तक की सबसे बड़ी किसान योजना है. इस पर हर साल 75 हजार करोड़ रुपए तक खर्च करने का लक्ष्य है. जानकारी है कि इस योजना में लगभग 33 लाख फर्जी लाभार्थी शामिल हैंय इन लोगों ने सरकार को 2326 करोड़ रुपए तक का चूना लगाया है.

इतनी हुई रिकवरी

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 231 करोड़ रुपए वसूले गए हैं. मगर अब भी 17 राज्यों से एक भी रुपए की रिकवरी नहीं हुई है. बिहार सरकार की बात करें, तो  यहां के फर्जी किसानों की सुविधा के लिए बाकायदा रिकवरी लिस्ट जारी कर दी गई है. इसमें हर ग्रामसभा के ऐसे किसानों (Farmers) के नाम और फोन नंबर दिए गए हैं, जिन्होंने अवैध रूप से योजना का लाभ उठाया है. मगर यहां 34 करोड़ की जगह मात्र 70 हजार रुपएए की वसूली हो पाई है.

किसान आयोग बनाने की मांग पर SC में याचिका, स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट का दिया हवाला

देशभर में किसानों की आर्थिक और नीतिगत और कानूनी अधिकार के लिए केंद्र स्तर और राज्य स्तर पर किसान आयोग (Farmers Commission) बनाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दाखिल की गई है.

खास बातें

• किसान आयोग बनाने की मांग
• सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका
• वकील शिव कुमार ने दाखिल की याचिका

नई दिल्ली: देशभर में किसानों की आर्थिक और नीतिगत और कानूनी अधिकार के लिए केंद्र स्तर और राज्य स्तर पर किसान आयोग (Farmers Commission) बनाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जनहित याचिका दाखिल की गई है. याचिका में कहा गया है कि किसानों के लिए उनके संवैधानिक और मूल अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग बनाना बेहद जरूरी है. याचिका में स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में भी किसानों के लिए एक संवैधानिक आयोग बनाने की बात कही थी.
याचिका में कहा गया है कि किसानों के लिए आयोग न होना, किसानों के मूल अधिकारों के तहत आर्टिकल 14, 19 और 21 का उल्लंघन करता है. याचिका के मुताबिक, देश के अधिकतर किसान लोन, फसल खराब होने, फसल उचित मूल्य पर बेचने में नाकामी, पारिवारिक समस्या, समस्याओं के समाधान के लिए उचित मंच के अभाव में जी रहे हैं. याचिका में 2004 में एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में बनाए गए आयोग और उसकी चार अंतरिम रिपोर्ट के साथ चार अक्तूबर 2006 को आई फाइनल रिपोर्ट का भी जिक्र है.

मुर्गी और बत्तख को छोड़ 280 अंडे देने वाले इस पक्षी का करें पालन, कम खर्च में मिलेगा ज्यादा मुनाफ़ा

आजकल बाजार में अंडे और मीट की खपत तेजी से बढ़ रही है, इसलिए इन क्षेत्रों में कमाई के अवसर भी काफी बढ़ गए हैं. आम तौर पर लोग मुर्गी और बत्तख पालन के व्यवसाय की ओर रूख कर रहे हैं. वैसे एक साल में देसी मुर्गी औसतन 150 से 200 अंडे देती है. मगर आज हम जिस पक्षी की बात करने वाले हैं, वह औसतन 280 से 300 अंडे देता है. आज हम जापानी बटेर (Japanese Quail) की बात करने जा रहे हैं. इस विषय़ में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई है.

कृषि विज्ञान केंद्र के मुताबिक…

मुर्गी पालन (Poultry) की तुलना में जापानी बटेर का पालन (Japanese Quail Farming) में कम लागत लगती है. यह व्यवसाय कम खर्चीला होता है. इसमें कम जगह की आवश्यकता पड़ती है. पहले बटेर को मीट के लिए घरों में पाला जाता था, लेकिन अब इसकी मांग बढ़ती जा रही है, इसलिए इसको व्यवसाय के रूप में ज्यादा अपनाया जा रहा है. बटेर की कम देखरेख में अच्छा उत्पादन प्राप्त होता है.

बटेर की पालने योग्य किस्में

आमतौर पर जापानी बटेर को बटेर कहा जाता है. इसे पंख के आधार पर विभिन्न किस्मों में बांटा जाता है. इसमें फराओं, इंगलिश सफेद, टिक्सडो, ब्रिटश रेज और माचुरियन गोल्डन आदि शामिल हैं. ऐसे में देश में जापानी बटेर का पालन अपनाना किसानों के लिए मुर्गी, बत्तख पालन जैसे क्षेत्र में एक नया विकल्प है. इसके साथ ही लोगों को स्वादिष्ट और पौष्टिक आहार उपलब्ध हो जाता है, जो कि महत्वपूर्ण साबित होता है. बता दें कि सबसे पहले केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान, इज्जतदार, बरेली में बटेर को पालन के लिए लाया गया था. जहां इस पर शोध का काम किया गया. इसको आहार के रुप में इस्तेमाल किया जाता है. बता दें कि बटेर में अन्य विशेष गुण भी पाए जाते हैं.

45 दिन की आयु से अंडे देने लगती है बटेर

• हर साल जापानी बटेर 3 से 4 पीढ़ियों को जन्म देने की क्षमता रखती है.
• मादा बटेर 45 दिन की आयु से ही अंडे देना शुरू कर देती है.
• 60वें दिन तक पूर्ण उत्पादन की स्थिति में आ जाती है.
• जब इसे अनुकूल वातावरण मिलता है, तो लंबी अवधि तक अंडे देती रहती है.
• मादा बटेर साल में औसतन 280 अंडे दे सकती है.

1 मुर्गी की जगह में 8-10 बटेर का पालन

आपको बता दें कि एक मुर्गी के लिए निर्धारित स्थान में 8 से 10 बटेर (how to start quail farming) रखे जा सकते हैं. इनका आकार छोटा होता है, इसलिए इनका पालन आसानी से किया जा सकता है. बटेर पालन में दाने की खपत भी कम होती है. इनका शारीरिक वजन तेजी से बढ़ता है, इसलिए ये 5 हफ्ते में ही दाना खाने योग्य हो जाती हैं.

अंडे और मांस से मिलते हैं पोषक तत्व

बटेर के अंडे और मांस में अमीनो अम्ल, विटामिन, वसा और अन्य पोषक पदार्थ मौजूद होते हैं. यह स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी हैं. बटेरों में संक्रामक रोग कम होते हैं, साथ ही बीमारियों की रोकथाम के लिए मुर्गी-पालन की तरह किसी तरह का टीका लगवाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है.

Vegetable Cooler: सब्जियों को ताज़ा रखने का सबसे सस्ता कूलर, 7 दिनों तक खराब नहीं होंगी सब्जियां

सब्जी और फलों की खेती करने वाले छोटे किसानों को सबसे ज्यादा दिक्कतें अपने उत्पादन के रखरखाव और भंडारण में होती है. लेकिन किसानों की इस समस्या का हल इंजीनियरिंग के पूर्व छात्रों ने निकाला है और बेहद सस्ता और अनोखा कूलर तैयार किया है. इस विशेष सब्जी कूलर में 4 से 6 दिनों के लिए सब्जियों को तरोताज़ा रखा जा सकता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा. तो आइये जानते हैं इस अनोखे कूलर की खासियतें.

आईआईटी के छात्रों ने किया ईजाद

किसानों की उपज को अधिक दिनों तक भंडारित करके रखा जा सकें इसके लिए आईआईटी मुंबई के पूर्व छात्रों ने इस खास सब्जी कूलर को ईजाद किया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना बिजली के ही चलता है. जो किसानों की सब्जियों को एक हफ्ते तक ताज़ा रखेगा. इस कूलर को इंजीनियर सरयू कुलकर्णी, विकास झा और गुणवंत नेहटे ने विकसित किया है. ताकि किसानों की हरी सब्जियां ज्यादा दिनों तक ख़राब न हो और उसे मंडियों तक आसानी से पहुंचाया जा सकें. वहीं इसकी डिजाइन को ठाणे स्थित रूकार्ट टेक्नोलॉजी ने किया है.

बेहद सस्ता और टिकाऊ

एग्रीटेक स्टार्टअप के गुणवंत नेहटे का कहना है कि इस कूलर को खेती एक जोखिम को कम करने तथा किसानों को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनाने के लिए गया है. यह बेहद सस्ता, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल है. उन्होंने बताया कि जब हमने अपने पढ़ाई के दौरान गांवों में जाते थे तो देखते थे किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता है. जिसकी सबसे बड़ी वजह है सब्जियों के जल्दी ख़राब होना. ऐसे में छोटे किसान महंगे और बड़े कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कराना आसान नहीं होता है. इसलिए हमने रुकार्ट के सह-संस्थापक विकास झा के साथ मिलकर सब्जी कूलर के कॉन्सेप्ट पर काम किया.

कैसे काम करता है यह कूलर

•रूकार्ट के विकास झा का कहना है कि यह कूलर वाष्पीकरणीय शीतलन की थ्योरी पर आधारित है. इसमें बिजली की आवश्यकता नहीं पड़ती है लेकिन दिन में एक बार पानी देना पड़ता है. किसान अपनी सुविधा के अनुसार इसका निर्माण करवा सकते हैं. उनका कहना है कि जहां किसानों ने ये कूलर बनवाये हैं वे किसान अन्य किसानों की तुलना में सब्जियों को 30 फीसदी अधिक दाम में बेच रहे हैं. हाल ही में रूकार्ट ने ओडिशा के सुंदरगढ़ में 50 से अधिक सब्जी कूलर लगाए हैं. देश के वे छोटे और मंझोले किसान जो सब्जियों को कोल्डस्टोरेज में नहीं रख सकते हैं उनके लिए ये बेहद फायदेमंद है.

फ्री में बनवाएं किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), जानें- आयु-सीमा और ज़रूरी दस्तावेज़

केंद्रीय सरकार ने अन्नदाताओं को साहूकारों के चंगुल से बचाने के लिए एक योजना लागू की है, जिसका नाम किसान क्रेडिट कार्ड (KCC-Kisan Credit Card Scheme) है. सरकार चाहती है कि देश के किसी भी किसान को साहूकारों से कर्ज लेने की ज़रूरत न पड़े.

अगर पिछले 2 साल का रिकॉर्ड देखा जाए, तो लगभग 2.24 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड जारी भी किए गए हैं. इसकी मदद से किसानों के लिए खेती करना काफी सस्ता हो गया है, क्योंकि सरकार की तरफ से सिर्फ 4 प्रतिशत ब्याज दर पर लोन (Loan) की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. इसीलिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना को किसान क्रेडिट योजना से लिंक भी कर दिया गया है.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक

जानकारी के लिए बता दें कि साल 2018-19 में 1,00,78,897 किसानों को केसीसी मुहैया करवाया गया था, जबकि साल 2019-20 में 1,23,63,138 केसीसी बनाए गए हैं. सरकार का लक्ष्य है कि पीएम किसान योजना (PM Kisan Yojana) के सभी लाभार्थियों को केसीसी (KCC) योजना का लाभ मिल सके. इसके लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं.

केसीसी लोन पर ब्याज

खेती-किसानी के लिए केसीसी (KCC) पर लिए गए 3 लाख रुपए तक के लोन की ब्याज दर 9 प्रतिशत है, लेकिन सरकार ईमानदार किसानों को 5 प्रतिशत सब्सिडी पर लोन प्रदान करती है. इसी तरह सिर्फ 4 प्रतिशत ब्याज पर पैसा मिल जाता है. इसकी वैलिडिटी 5 साल रखी गई है.

किसान क्रेडिट कार्ड के फायदे

• किसान को 60 लाख रुपए तक के लोन पर गारंटी की जरूरत नहीं होगी है.
• केसीसी की मदद से खेती संबंधी चीजें खरीद सकते हैं.
• केसीसी लेने पर फसल बीमा कराना स्वैच्छिक हो गया है.
• अब डेयरी और मछलीपालन के लिए भी केसीसी मिलता है.

कौन ले सकता है किसान क्रेडिट कार्ड

• केसीसी खेती-किसानी, पशुपालन और मछलीपालन से जुड़ा कोई भी व्यक्ति ले सकता है.
• अगर किसी और की जमीन पर खेती करने वाले व्यक्ति भी केसीसी का लाभ उठा सकते हैं.

केसीसी लेने के लिए आयु सीमा

इसका लाभ उठाने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 18 साल और अधिकतम 75 साल होनी चाहिए. किसान की उम्र 60 साल से अधिक है, तो एक को-अप्लीकेंट भी लगेगा.

जरूरी दस्तावेज़

• खेती के कागजात
• आधार कार्ड
• पैन कार्ड की फोटो कॉपी
• किसी और बैंक में कर्जदार न होने का एफीडेविड
• आवेदक की फोटो

नहीं लगेगी प्रोसेसिंग फीस

आपको बता दें कि केसीसी योजना को किसानों की सहूलियत के लिए लागू किया गया है. अगर किसान केसीसी बनवाते हैं, तो किसी तरह की फीस नहीं देनी होगी, क्योंकि सरकार ने इस पर किसी भी तरह का चार्ज लेना खत्म कर दिया है. बता दें कि इससे पहले प्रोसेसिंग, इंस्पेक्शन और लेजर फोलियो चार्ज लगता था. इसके साथ ही जब किसान का आवेदन पूरा हो जाएगा, तब 14 दिन में ही किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने का आदेश जारी कर दिया जाएगा. हालांकि, केसीसी के तहत लोन देने से पहले बैंक किसान का सत्यापन करेगा. इसके तहत देखेगा जाएगा कि आप किसान हैं या नहीं. इसके लिए जमीन का रिकॉर्ड भी चेक किया जाएगा.

ज़रूरी सूचना

इस कार्ड को बनवाने के लिए फार्म भी पीएम किसान स्कीम की वेबसाइट (pmkisan.gov.in) पर उपलब्ध है. किसान भाई यहीं से केसीसी फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं.

PM Kisan Yojana 8th installment: किसानों को इस महीने मिल सकती है 8वीं किस्त, घर बैठे चेक कर लें लिस्ट में अपना नाम

केंद्र सरकार द्वारा जरूरतमंद किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Yojana) के तहत आर्थिक मदद प्रदान की जाती है. इस योजना के तहत हर लाभार्थी को 6 हजार रुपए की धनराशि दी जाती है.
बता दें कि अभी तक केंद्र सरकार द्वारा किसानों के खाते में कुल 7 किस्तें सीधे खाते में ट्रांसफर की जा चुकी हैं. अब किसानों को पीएम किसान योजना की आठवीं किस्त (PM Kisan Yojana 8th installment) का इंतजार है. आइए आपको बताते हैं कि पीएम किसान योजना की आठवीं किस्त (PM Kisan Yojana 8th installment ) कब तक भेजी जाएगी.

3 किस्तों में मिलता है पैसा

पीएम किसान योजना (PM Kisan Yojana) की राशि किसानों को 3 किस्तों में भेजी जाती है. हर किस्त में 2-2 हजार रुपए दिए जाते हैं. इस योजना के तहत अप्रैल-जुलाई के बीच पहली किस्त भेजी जाती है, तो वहीं अगस्त से नवंबर महीने के बीच दूसरी और दिसंबर से मार्च के बीच तीसरी किस्त भेजी जाती है.

लाभार्थी घर बैठे चेक करें लिस्ट में अपना नाम

• सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं.
• यहां अब राइट साइड पर ‘Farmers Corner’ का विकल्प आएगा.
• इसके बाद ‘Beneficiary Status’ के विकल्प पर क्लिक करें.
• अब एक नया पेज खुलकर सामने आएगा.
• अब एक नए पेज पर आधार नंबर, बैंक अकाउंट नंबर या मोबाइल नंबर में से किसी एक विकल्प का चुनाव करें.
• ध्यान दें कि इन तीन नंबरों के जरिए चेक किया जा सकता है कि आपके खाते में पैसे आए या नहीं.
• अब आपने जिस विकल्प का चुनाव किया है, उसका नंबर भरिए.
• इसके बाद ‘Get Data’ पर क्लिक करिए.
• इस पर क्लिक करते ही सभी ट्रांजेक्शन की जानकारी मिल जाएगी.
• इसके साथ ही 8वीं किस्त से जुड़ी जानकारी भी मिल जाएगी.

किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रमुख फसल हो सकती है बांस : केंद्रीय कृषि मंत्री

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 25 फरवरी को ‘भारत में बांस के लिए अवसर और चुनौतियों पर राष्ट्रीय परामर्श’ के उद्घाटन सत्र को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया. बता दें, कि राष्ट्रीय बांस मिशन, नीति आयोग और इन्वेस्ट इंडिया ने बांस क्षेत्र से जुड़े दो दिवसीय मंथन को संयुक्त रूप से आयोजित किया.
इस मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि केन्द्र सरकार बांस क्षेत्र के विकास की दिशा में खासे प्रयास कर रही है, क्योंकि यह स्पष्ट है कि विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र में किसानों की आय दोगुनी करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और लोगों की आजीविका में सुधार में यह फसल खासी अहम हो सकती है.
कृषि मंत्री ने बांस की खेती को अपनाने के लिए छोटे और सीमांत किसानों को प्रोत्साहित करने को एफपीओ के गठन पर भी जोर दिया, इसके लिए उन्होंने राज्यों से बांस क्षेत्र के लिए एफपीओ के गठन से जुड़े प्रस्ताव भेजने का अनुरोध किया.

राष्ट्रीय बांस मिशन’ की सराहना

अंकुरण के चरण में बांस की प्रजातियों और गुणवत्ता की पहचान करने में आने वाली मुश्किल को देखते हुए केन्द्रीय मंत्री ने नर्सरियों को मान्यता देने और पौधारोपण सामग्री के प्रमाणन के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के लिए ‘राष्ट्रीय बांस मिशन’ की सराहना की है. उन्होंने कहा, “राज्य फिलहाल नर्सरियों को मान्यता देने की प्रक्रिया में हैं और किसानों व उद्योग के मार्गदर्शन के लिए इनका ब्योरा सार्वजनिक कर दिया गया है, जहां वे अच्छी पौधारोपण सामग्री हासिल कर सकते हैं.”
बांस क्षेत्र की उपलब्धियों के बारे में बात करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल में व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण बांसों की पौध 15,000 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाई गई है. किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधारोपण सामग्रियों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, ‘राष्ट्रीय बांस मिशन’ के अंतर्गत 329 नर्सरियों की स्थापना की गई थी. इसके अलावा राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत 79 बांस बाजार बनाए गए हैं. बांस आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था के एक मॉडल की स्थापना के लिए इन गतिविधियों को पायलट परियोजनाओं के रूप में देखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि मिशन से जुड़े कदमों के साथ सार्वजनिक और निजी उद्यमियों के तालमेल से किसानों व स्थानीय अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार के सरकार के प्रयासों को मजबूती मिलेगी.

सबसे ज्यादा दूध दे सकती हैं भैंस की ये 4 नस्लें, पढ़िए पूरा लेख

हमारे देश की एक बड़ी आबादी भैंस पालन से जुड़ी हुई है. यहां भैंसों की कई नस्लों का पालन किया जाता है. केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान की मानें, तो भैंसों की नागपुरी, पंढरपुरी, बन्नी, मुर्रा, नीलीरावी, जाफराबादी, चिल्का, भदावरी, सुर्ती, मेहसाणा, तोड़ा, समेत 26 तरह की नस्लों का पालन किया जाता है.
इनमें से 12 नस्ल रजिस्टर्ड नस्लें हैं, जो कि सबसे ज्यादा दूध देने के लिए जानी जाती है. इनमें चिल्का, मेहसाना, सुर्ती और तोड़ा जैसी भैंस भी शामिल हैं. ऐसे में आज हम आपको भैंसों की इन नस्लों की जानकारी देने वाले हैं.

सुर्ती भैंस

यह नस्ल गुजरात के खेड़ा और बड़ौदा में पाई जाती है. इनका रंग भूरा, सिल्वर सलेटी या फिर काला होता है. यह आकार में मध्यम होती हैं, साथ ही धड़ नुकीला और सिर लंबा होता है. इनके सींग दराती के आकार के होते हैं. इसकी औसत उत्पादन क्षमता 900 से 1300 लीटर प्रति ब्यांत होती है. भैंस की इस नस्ल के दूध में 8 से 12 प्रतिशत वसा की मात्रा पाई जाती है.

मेहसाना भैंस

यह नस्ल गुजरात के मेहसाणा जिले और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में पाई जाती है. भैंस की इस नस्ल का रंग काला होता है, तो वहीं कुछ का रंग काला-भूरा भी पाया जाता है. इनका शरीर मुर्रा नस्ल की भैंस के तुलना में काफी बड़ा होता है. मगर इनका वजन उनसे कम होता है. इनके सींग दरांती से आकार के होते हैं, तो वहीं मुर्रा भैंस से कम घूमी हुई रहती हैं. इसका औसत उत्पादन 1200 से 1500 किलो प्रति ब्यांत होता है.

तोड़ा भैंस

आदिवासियों के नाम पर भैंस की इस नस्ल का नाम तोड़ा पड़ा है, जो कि तमिलनाडु के नीलगिरी पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है. इस नस्ल के शरीर पर काफी मोटा बालकोट होता है. इनकी औसत उत्पादन क्षमता प्रति ब्यांत 500 से 600 किलोग्राम होती है. खास बात यह है कि इनके दूध में 8 प्रतिशत वसा की मात्रा पाई जाती है.

चिल्का भैंस

भैंस की इस नस्ल को उड़ीसा कटक, गंजम, पुरी और खुर्दा जिलों में पाया जाता है. इस भैंस का नाम उड़ीसा के चिल्का के झील के नाम पर पड़ा है. इसे ‘देशी’ नाम से भी जाना जाता है. यह भैंस खारे क्षेत्रों में ज्यादा पाई जाती है. इसका रंग भूरा-काला या काला होता है. यह आकार में मध्यम होती है, साथ ही औसत दूध उत्पादन 500 से 600 किलोग्राम प्रति ब्यांत होता है.

Piyush Goyal asks ICAR to explore possibilities to grow imported fruits

Piyush Goyal Commerce and Industries Minister

New Delhi: Commerce and industry minister Piyush Goyal, on Wednesday, asked Indian Council of Agricultural Research (ICAR) to coordinate with commerce ministry to examine data of imported agri produce and explore possibilities of growing these in the country towards becoming self sufficient.

“We import flowers worth Rs 230 crore while the import value of fruits is around Rs 5,000 crore. ICAR can get the data from commerce ministry and evaluate the kind of soil used, amount of fertiliser and water required and surrounding markets where these can be sold,” Goyal said while addressing 92nd annual general meeting of ICAR.

He said that there is lot of scope in the cultivation of flowers and horticulture crops in the country.

“We must keep a tab on tastes of people. For example, Avocado is not produced in India. Once while a negotiation, America was insisting on export of Avocado to India. I think there is big market for this fruit in the country with large base of health conscious middle class,” he said.

Goyal said that innovations should be introduced to keep interest for farming alive in the younger generation.

“We can’t think progress of the country without farmers,” he said.

Goyal said that innovations should be introduced to keep interest for farming alive in the younger generation.

“We can’t think progress of the country without farmers,” he said.

He said that farming camps should be organised for school and college students to draw them towards agriculture.

“ICAR should introduce new practices and experiments to attract young blood. It should think about collaborating farmers with start ups which can increase farmers’ income as well as allow start ups to sell farm produce across the globe. It can also think of conducting tasting tours – the way these are held in foreign countries for wine tasting,” he said adding that people here also go for strawberry tasting in Mahabaleshwar in Maharashtra.

source:-Krishihelpline

Rajju Bhai conferred Padma Bhushan Award 2021; A Proud Moment for Indian Crop Protection Industry


Rajju Bhai 




Padma Awards – one of the highest civilian Awards of the country, are conferred in three categories, namely, Padma Vibhushan, Padma Bhushan and Padma Shri. The Awards are given in various disciplines/ fields of activities, viz.- art, social work, public affairs, science and engineering, trade and industry, medicine, literature and education, sports, civil service, etc.

‘Padma Vibhushan’ is awarded for exceptional and distinguished service; ‘Padma Bhushan’ for distinguished service of high order and ‘Padma Shri’ for distinguished service in any field. The awards are announced on the occasion of Republic Day every year.

These awards are conferred by the President of India at ceremonial functions which are held at Rashtrapati Bhawan usually around March/ April every year. This year the President has approved conferment of 119 Padma Awards including 1 duo case (in a duo case, the Award is counted as one) as per list below. The list comprises 7 Padma Vibhushan, 10 Padma Bhushan and 102 Padma Shri Awards. 29 of the awardees are women and the list also includes 10 persons from the category of Foreigners/NRI/PIO/OCI, 16 Posthumous awardees and 1 transgender awardee. 

Shri Rajnikant Devidas Shroff, Chairman UPL commonly known as Rajju Bhai in the Indian Pesticide Industry has been conferred with the prestigious Padma Bhushan this year  under the category of Trade and Industry from the State of Maharashtra.

source:-Krishihelpline

Careers in Agriculture: Top 10 Highest Paying Agriculture Jobs in India in 2021

Those days are gone when agriculture was only meant for farmers and need to put blood and sweat in the soil to produce crops. Now, this is an era of technology and green is the only hope for the future. The importance of agriculture has revived back and the demand for this field will only increase in the future. People need to understand that agriculture is a vast era and it’s not only related to farming. Moreover, it is inter-related with many other departments and fields which makes it more demanding. Numerous opportunities have sprouted over time, giving young people plenty of options to pick from.
As per reports from a few journals, in the US alone, over 50,000 jobs in agriculture are available per year; only there aren’t enough qualified graduates to fill the vacancies. On the other hand, the UK also seems to be experiencing similar problems with a labor shortage, as their horticultural sectors continually struggle to find new workers year after year. If we look at the scenario of India, there are lots of vacancies in the Agriculture and horticulture department as well which are expected to increase in the future.
Indian Forest Service Officer (IFS ):-
It has a pay scale of 37k- 67k. One must complete graduation in science stream to become an IFS officer. However, a degree in science stream does not guarantee a job in Indian Forest Service. One must appear for the IFS examination conducted by the Union Public Service Commission (UPSC). The recruitment process involves three stages, i.e., written exam prelims, written exam mains, and interviews. One must clear all the rounds of the recruitment process to become an IFS officer. The selected candidates will be trained for two years at Indira Gandhi National Forest Academy.
The major responsibility of the IFS officer is to manage the forests, environment, and wildlife issues of a state of India.
Nabard Grade “B” officer:-
Payscale is 28K-56K. This specially for the ones who hold interest in the agricultural field and its development by hosting a pan India exam to recruit NABARD Grade B Officers. Candidates who get selected in NABARD Grade B work as “Development Assistants”.
Candidates who have finished their graduation or post-graduation in any subject/order can apply for the examination, and the minimum qualifying marks should be 60% for the general category.
Candidates between 21 to 35 years can apply for the exam.
Agricultural research scientist(ARS):-
Payscale is 16K-40K and grade pay-6K. This competitive Agricultural Research Services Examination is conducted for the recruitment of scientist vacancies in Agricultural Research Services (ARS) under various disciplines (at present there are 55 related disciplines). This exam is conducted in two stages namely ASRB ARS Preliminary Exam and the ASRB ARS Main exam.
Agricultural Field Officer (AFO):-
Payscale is 23K-42K. If you are looking for a job that does not come wrapped with expensive professional degrees, then Agricultural Field Officer is the best vacancy for you. It also helps you to stay grounded by working for Rural Development.
As per the RBI’s Guidelines to commercial banks, banks need to open at least 25% of the branches in a year in the unbanked rural area.
An Agriculture Field Officer directly works with farmers & companies related to agriculture, rural development & its allied fields.
Agricultural Development Officer or ADO:-
An agricultural officer post is one of the most prestigious and well-paid jobs in the agriculture sector. The salary of an agriculture officer is Rs. 40,000 to Rs. 80,000 depending upon the department or division he is working for.An agriculture officer has to ensure that all the agricultural practices & products are in lieu of the state & local regulations. His main task is to check, investigate, sample & test everything, so as to determine whether they are complying with the state & local rules and regulations.If you want to become an agriculture officer, then you will have to fulfill the following criteria; Should have a Bachelor’s Science degree in Agricultural Engineering / Agriculture Should have a degree in Biology & Agricultural Science.
Block Development Officer:-
Block Development Officer has to see that the plans and programmes approved by the appropriate authorities are executed efficiently.He signs contracts and authenticates all letters and documents for and on behalf of the Panchayat Samiti subject to the prior approval of the appropriate authority.BDO draws and disburses money out of the Panchayat Samiti Fund.
Crop Science/ Agriculture Manager:-
Agricultural Manager is a professional responsible for the daily planning, organization, supervision, and administration of activities on farm estates like raising animals, tend crops, plan strategies for maximum yield, organize farm administration, work machinery, organize associated businesses and manage staff.
The minimum educational qualification for becoming Agriculture Manager is Bachelor’s Degree programs in agriculture or related fields.
Biochemist:-
Biochemistry is the part of science that manages the investigation of science and science of living beings to benefit humanity. In the field of horticulture, the biochemist attempted to build up the fast developing, high yielding; bug and drought spell safe varieties
Agronomy Sales Manager
These experts are liable for preparing the team that will go to better places to instruct farmers on the best way to think about their land and harvests appropriately. Simultaneously, they additionally promote and sell their items which are regular seeds, soil, and manures.
Agricultural Educator:-
Last but not the least. If you have completed your graduation or post-graduation in agriculture, you can always pursue a dream career as an agricultural educator in any educational institution or research center.

source:-Krishihelpline

During India’s agricultural export grows: Economic Survey the three-month Kisan Kalyan Mission beginning Jan 6, Yogi will congratulate 100 progressive farmers in each district

NEW DELHI: India’s agricultural products exports of marine, rice, sugar and spices have witnessed an increasing trend in 2019-20, said the Economic Survey. It said that India has been a net exporter of agri products since the economic reforms began in 1991

“Agri-exports touched Rs 2.52 lakh crores and imports at Rs 1.47 lakh crores in financial year 2019-20,” the survey said.

India occupies a leading position in global trade of agricultural products. However, its total agricultural export basket accounts for a little over 2.5 percent of world agricultural trade. The major export destinations were USA, Saudi Arabia, Iran, Nepal, and Bangladesh.

Among the key agriculture commodities exported from India were marine products, basmati rice, buffalo meat, spices, non-basmati rice, cotton raw, oil meals, sugar, castor oil and tea.

An analysis of the last six years of the share of top ten agricultural commodities in total value of agricultural export shows that the share of marine products in total agricultural export value has remained the largest over the period, the survey said. “Its share in total agricultural export value increased from 14.5 per cent in 2015-16 to close to 19 per cent in 2019-20,” it said.

The share of basmati rice, non-basmati rice, spices and sugar in total agricultural export value has also shown an increasing trend during the period.


source:-Krishihelpline

KVK Organizes Awareness Program on New Farm Laws for Farmers

Indore:- KrishiVigyan Kendra, Kasturbagram, Indore, Madhya Pradesh organized awareness programs to provide all the necessary information about new agricultural laws. And they also organized SwacchataPakhwada from 16th December to 31st December.
About KVK:-
The KrishiVigyan Kendra (KVK) is district level Farm Science Centre established by the Indian Council of Agricultural Research (ICAR) for speedy transfer of technology to the farmers’ fields. The aim of KVK is to reduce the time lag between generation of technology at the research institution and its transfer to the farmers’ fields for increasing production and productivity and income from the agriculture and allied sectors on a sustained basis.
Awareness Program:-
This program was organized for five days, on 3,9,12, 16, & 29 December 2020. This awareness program was organized in the nearby villages including Gondakuwa, Akya, Bardari, Chapariya, TilloreKhurd, etc.
In this program new agricultural laws were discussed in detail and all the confusions were cleared regarding the laws, so that no misconceptions remain in farmers’ mind. Along with this, 2 webinars were also organized for the farmers by the KrishiVigyan Kendra and KrishiAbhiyantriki Department.
About the Program:-
Scients of KrishiVigyan Kendra explained about the sales of agricultural produce, contract farming, etc. in detail in the seminars organized by Farmer Welfare and Agriculture Development Department andAatma. They also discussed about the other necessary information with farmers. And also tried to resolve all the curiosities of the farmers related to the new farm laws.

source:-Krishijagran

PM SVANidhi Yojana: Purpose, Benefits and Application Process

PM SVANidhi scheme (PM Street Vendor), which was introduced in June in the midst of the pandemic, is a micro-credit facility that offers a collateral-free loan of Rs 10,000 with low interest rates for a term of one year to street vendors.
The scheme, part of the AtmaNirbhar Bharat Abhiyaan, has received 31,64,367 applications from across the nation so far (except from Sikkim, which is officially not taking part in it). 16,77,027 of the overall applications were sanctioned and 12,17,507 disbursed.
Purpose of the scheme:-
The COVID-19 pandemic and the national lockdown have left street vendors and many othersjobless. The aim of the scheme is to help the vendors financially get back on their feet. It aims to build a credit score for the suppliers in the long run, as well as to construct a digital database of their socio-economic status, so that they can then use the central government programs. The program further aims to formalize the informal sector of the economy and, in the future, provide them with safety nets and a way of using loans.
Most manufacturers are part of what people call the underground economy, and frequently borrow from private lenders who demand exorbitant interest rates on them. This loan charges interest rates below 12 percent which generates a vendor’s credit score so that they can gain more if they repay the loan on time. In addition, Sanjay Kumar, Joint Secretary of the Union Ministry of Housing and Urban Affairs, said that by developing a digital record of them and their socio-economic profile, it will help them use various other 8-9 central government schemes that provide a sort of safety net, helping to mitigate their poverty.
How to apply for it?
The loan will be used by all vendors that have been selling from or prior to March 24, 2020 and with a vending stamp. As per the 2014 Street Vendors Act, the Town Vending Committees (which includes local authorities and vendors from an area) grant a vending certificate after a survey of all vendors has been conducted.
But because the study has not yet been completed by many states and towns, many vendors are unable to offer any such vending certificates. Instead, as per the plan, for each vendor who wants to use the loan, the urban local authorities, in this case the municipalities will have a letter of recommendation.
These records, including proof of identity, are submitted to a special portal created for the system, and banks approve the loans and disburse them, preferably, within 10-15 days.
What difficulties are faced by vendors while applying for a loan?
In compliance with the rules notified by the Delhi government in 2016, Delhi has not yet conducted a city-wide survey of vendors. Vendors who have earned the loans are often evicted either by the police or by ULB officials from their place, impacting their only source of income and their ability to repay the loan. Mobile numbers of different vendors are not affiliated with their Aadhar cards, and camps have now been set up by different ULBs to resolve this problem. In order to correct this problem and support the vendors in the online application process, several vendor groups are now setting up camps at markets.
If the city has not completed a Town Vending Committee survey as per the Act, does the scheme legitimize the applicants’ sales?
If the LOR has been released by the ULBs, its mandate lasts one month, during which the ULBs can perform a survey for the issuance of a vending license. But since it is a state issue, it is only possible for the central government to guide or raise awareness of the value of doing so and not to evict vendors who have made use of the loan but do not have a certificate, Kumar said.
Rajesh Goyal, deputy commissioner of the Karol Bagh district, which is part of the North Delhi Municipal Corporation, said, “The LORs issued by the ULB do not grant any legal permission or vending rights, as the scheme does not mention this.” At present, the largest number of applications (over 50,000) and disbursement rates has been seen in Hyderabad. In that order, Bengaluru, Mumbai, Chennai, Delhi and Kolkata are ranked next, Kumar said. Just now has West Bengal announced the scheme, he said.
The top performing states are Telangana, Andhra Pradesh, Uttar Pradesh, and Madhya Pradesh, which have also issued vending certificates either before the pandemic or in the past few months, Kumar said. Over 40,000 applications have been submitted from Agra, which beats even a big city like Delhi.

source:-Krishihelpline

PM Kisan Sampada Yojana: How this Scheme will help and support Farmers in 2021?

In midst of the farmer’s agitation, Prime Minister Narendra Modi has recently announced that under PM Krishi Sampada Yojana, around 6500 projects like mega food parks, cold chain infrastructure, agro-processing clusters have been approved. While flagging off the 100th ‘Kisan Rail’ from Sangola in Maharashtra to Shalimar in West Bengal, he also stated that Rs 10,000 crores have been approved for micro food processing industries under government’s ‘Atmanirbhar’ package. What is PM Kisan Sampada Yojana?
It’s a Central government scheme which was approved by the Centre in May 2017 for the period of 2016-20 coterminous with the 14th Finance Commission cycle. Moreover, the scheme has now been renamed as the “Pradhan Mantri Kisan Sampada Yojana (PMKSY).
What is the Main Objective of PM Kisan Sampada Yojana?
The objective of PMKSY is to supplement agriculture, modernize processing and decrease Agri-Waste.

What all will beincluded under PMKSY?

  • Mega Food Parks
  • Integrated Cold Chain, Value Addition and Preservation Infrastructure
  • Creation/Expansion of Food Processing/Preservation Capacities
  • Infrastructure for Agro Processing Clusters
  • Scheme for Creation of Backward and Forward Linkages
  • Food Safety & Quality Assurance Infrastructure
  • Human Resources and Institutions
  • PMKSY has an Allocation of Rs 6,000 crore
  • As per reports, PM Kisan Sampada Yojana has an allocation of Rs 6,000 crore and is expected to leverage investment of Rs 31,400 crore, handling of 334 lakh MT agro-produce valuing Rs 1,04,125 crore. This scheme will benefit 20 lakh farmers and generate 5,30,500 direct/ indirect employment in the country by the year 2019-20.

    source:-KrishihelplineContract Farming will be Beneficial for the Farmers: CM Shivraj

    Madhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chouhan told private companies to stop snatching farm lands from farmers in the name of Contract farming. And he also mentioned about the recent decisions in some districts taken on the basis of new farm laws, and how they benefitted the farmers. And, also to get the justified price for their yield. Prime Minister Narendra Modi addressed Madhya Pradesh farmers through video conferencing and during the programme state government has transferred Rs. 1600 Crore in the accounts of Madhya Pradesh farmers.
    Chouhan also mentioned that, some parties are misleading farmers and provoking them on the name of new farm laws and misguiding them. These parties are those who are not even able to stand in front of PM Modi.
    About Contract Farming:-
    He said that some parties are misguiding farmers by saying that as per the new farm law, private companies will snatch the land of farmers on the name of contract farming. Chouhan said, “Today, can any company dare to take possession of the farm land?”
    CM Chouhan said that contract farming for farmers is to get the justified prices for their produce. And he said, “What is wrong with contract farming? In fact, farmers get the idea about the price of their produce at the time of sowing only. And farmers can sell their produce anywhere, whether its mandi or other market by getting the licence. And the main objective is only that farmers must get the good price for their produce.”
    Kisan Credit Cards:-
    He also mentioned that, BJP has given relief to farmers. And distributed Kisan credit cards and provided relief to the beneficiaries. And along with that, they also inaugurated the lay foundation stones of some agro-infra projects. And after the video conference by PM, Madhya Pradesh farmers have no confusions regarding the farm laws.
    source:-Krishijagran

    Dairy Farming: How to run a Profitable Cow Dairy Farm in India

    In the course of the most recent decade, India has encountered a flood of interest in dairy farming. Endless dairy ranches have been opened, with cutting edge gadgets just as the best kinds of cow breeds. In any case, under half of these homesteads end up being reasonable in the long haul. Below you will find out why dairy ranches miss the mark, just as how the causes for the disappointment can be settled and managed for a profitable cow dairy ranch.
    Let’s first understand who can take up dairy farming:-
    People who have chosen to go through the current craze of dairy farming can be comprehensively divided into few groups. The first include individuals who wish to acquire the monetary techniques to start another cow dairy ranch. There are NRIs that select to spend their abundance income by spending in the horticulture area. The third group makes up youthful metropolitan specialists who develop discontent with their day work and look to return to their farming origins.
    Farming as a living:-
    Dairy farming, as most other kinds of farmer, isn’t a pay, however is an association. Dairy farming requires competence, dedication, and to a great extent, devotion. New dairy farmers particularly neglect to comprehend that they are dealing with real-time animals, just as not gadgets.
    Start small for better results:-
    In current times, most of the new established modern cow dairy ranches wrongly begin on a large scale. They fabricate tremendous sheds just as purchase a lot of cows directly toward the start of the business. It is truly hard to deal with issues when you are new to dairy cultivating and furthermore have an enormous group of animals to take care of. Rather than gaining a colossal group at the same time, you should start with acquiring cows slowly and the same will save you a month’s yield of milk.
    Understanding the cattles:-
    Numerous new dairy farmers absolutely target their efforts towards milking the cattles and refining the same, without really understanding the science around their animals. A ton of them don’t have a clue how to find warmth, or that the pet should conceive by the fourth or fifth month in the wake of calving. There have entirely been situations where farms with countless lactating steers didn’t have a solitary bull and were subject to regional government veterinary clinical experts for artificial semen injection.
    Calves care:-
    Because of the fact that the bones of the calf were not taken care of and proper treatment is not made available, many of the modern cow dairy ranches have quit working. There have really been instances of homesteads having in excess of 100 lactating cows yet just 20 to 30 calves enter into their adulthood. Proper care of the calves is exceptionally fundamental for the health of the herd in a long term. Calf bones for the females are explicitly critical to a cow dairy ranch, as they start giving milk inside a 3 to 4 year time period.
    Dairy farm management of feed and fodder:-
    Many of the dairy farmers provide magnificent amounts of feed as well as grass and hay during the initial period of lactation. As the milk yield began to diminish following the first five to six months, the farmer usually would cut down on the general limit of feed and fodder that was earlier provided. This happens so regularly in farms, that the pet size gets shrunk to half of its original size. While the amount of feed provided is reliant on the milk yield of the cattle, it is extremely important to take into consideration of its body weight and should never be given less feed considerably under any factor.
    Automation:-
    A great deal of new farm owners mean to completely mechanize their homesteads. Adjusting to hand-milked cows to milking hardware is a preliminary mistake that calls for time as well as consistency. In the end, farmers regularly desert their milking hardware, which is a major misuse of money when it doesn’t work right away.

    source:-Krishihelpline

    Top 10 Agricultural Mobile Apps for Farmers in 2021

    Rural India is drastically moving towards digitalization and technology these days. As per reports of ‘The Rising Connected Consumer in Rural India’, a study by the Boston Consulting Group, this share of rural India has jumped to 48% by 2020. Moreover, while 58% of Indian households still depend on Agriculture as their most eminent source of livelihood, it’s time to give more focus on Digital Agriculture for a growing and prosperous India.Moreover, farming apps are the most convenient and useful medium to guide farmers in farming. It gives you the guideline for doing the proper scientific way of farming, crop cultivation, sowing or harvesting of any crop or vegetables. Farmers can easily solve their farming problems related to pest or insect attack or any problems which put them in a difficult situation.A farming app can be the best friend of farmers in farming which can enhance their productivity without spending a single amount of money. You can easily download it from your Google play store without paying a single rupees.

  • Let’s know some of the best and reliable Agriculture Apps that are available in India along with regional languages. Links are given below to download.
  • Best Agriculture Apps for Farmers:-Kisan Suvidha:-
    It was launched by the PM Narendra Modi in 2016 to work towards the empowerment of farmers and the development of villages. The app design is neat and offers a user-friendly interface and provides information on current weather and also the forecast for the next five days, market prices of commodities/crops in the nearest town, knowledge on fertilizers, seeds, machinery etc. The option to to use the app in different languages makes it more widely accessible.
    IFFCO Kisan Agriculture:-
    Launched in 2015 and managed by IFFCO Kisan is a subsidiary of Indian Farmers’ Fertilizer Cooperative Ltd. Its aim is to help Indian farmers make informed decisions through customized information related to their needs. Moreover, the user can access a variety of informative modules including agricultural advisory, weather, market prices, agriculture information library in the form of text, imagery, audio, and videos in the selected language at the profiling stage. The app also offers helpline numbers to get in touch with Kisan Call Centre Services.
    RML Farmer- Krishi Mitr:-
    It’s a useful farming app where farmers can keep up with the latest commodity and mandi prices, precise usage of pesticides and fertilizers, farm and farmer related news, weather forecast and advisory. Moreover, it also provides agricultural advice and news regarding the government’s agricultural policies and schemes. As per the official, users can choose from over 450 crop varieties, 1300 mandis, and 3500 weather locations across 50,000 villages and 17 states of India. It is designed with specific tools to analyze or provide information on different aspects of farming habits.
    Pusa Krishi:-
    It’s a government app launched in 2016 by the Union Agriculture Minister and aims to help farmers to get information about technologies developed by Indian Agriculture Research Institute (IARI), which will help in increasing returns to farmers. The app also provides farmers with information related to new varieties of crops developed by Indian Council of Agriculture Research (ICAR), resource-conserving cultivation practices as well as farm machinery and its implementation will help in increasing returns to farmers.
    Agri App:-
    It’s a total farmer-friendly app that provides complete information on Crop Production, Crop Protection, and all relevant agriculture allied services. It also enables farmers to access all the information related to “High value, low product” category crops from varieties, soil/ climate, harvesting and storage procedures. Moreover, an option to chat with experts, video-based learning, the latest news, online markets for fertilizers, insecticides, etc. are also available on this app.
    Crop Insurance:-
    It’s a wonderful app which helps farmers to calculate insurance premium for notified crops and provides information cut-off dates and company contacts for their crop and location. It works as a reminder and calculator for farmers about their insurance. It can also be used to get details of the normal sum insured, extended sum insured, premium details and subsidy information of any notified crop in any notified area. It is further linked to its web portal which caters to all stakeholders including farmers, states, insurance companies, and banks.
    Kheti-Badi:-
    ‘Kheti-Badi’ is a social initiative App which aims to promote and support ‘Organic Farming’ and provide important information/issues related to farmers in India. This app helps farmers to switch their chemical farming into organic farming. However, this app is currently only available in four languages(Hindi, English, Marathi, and Gujarati).


    The app has been developed with an aim to keep farmers abreast of crop prices and discourage them to go for distress sales. Farmers can get information related to prices of crops in markets within 50km of their own device location using the AgriMarket Mobile App.
    Shetkari:-
    Shetkari Mitra is multi-functionalmobile app made for farmers in India. It provides information and knowledge about Governmental schemes, crop management, Agri Business & Guidelines,market ratesand success stories in agriculture.
    Fasal Salah:-
    Fasal Salah is an agro advisory mobile app that gives highly personalized farmer specific crop weather advisories to the Indian farmers.

    source:-Krishihelpline

    Good News for Farmers! Govt is Offering 50 to 90% Subsidy for Horticulture; Apply Now

    The Bihar Government has taken an important initiative to promote horticulture. The state government has announced to give subsidy to the farmers doing horticulture in Motihari district.Farmers doing horticulture in the state will get the benefit of subsidy under the Chief Minister’s Horticulture Mission. Under this, the target of various schemes has been set. The special thing to note is that there is a provision for giving separate subsidy to general caste and scheduled caste farmers.
    Let’s know how you can take the advantage of this subsidy:-
    Subsidy will be Given on these Crops under the Chief Minister Horticulture Mission, arrangements have been made to provide subsidy on mushroom, aromatic plant cultivation, floriculture, bee box, bee colony, plastic carat, and plastic tunnels, etc. General caste farmers will be given a subsidy of up to 70 percent. Along with this, SC and ST farmers will get a maximum subsidy of up to 90 percent.
    How much Subsidy will be Given?
    Up to 50 percent subsidy will be given on flower cultivation. If the cost of flower cultivation is 40 thousand rupees per hectare, then farmers will get a subsidy of up to 20 thousand rupees. Farmers can plant about 36 thousand flower plants in 1 hectare.For bee keeping, up to 75 percent subsidy will be given on the box of bee keeping. Farmers will get the subsidy of up to 3 thousand out of the 4 thousand rupees spent on each box.If the cost of cultivation of aromatic plants is Rs. 40 thousand, then the state government will give the subsidy at the rate of Rs. 20 thousand per hectare.And apart from all this, a provision has been made to give subsidy on plastic carats to the farmers. Farmers can avail the subsidy on the cultivation of selected crops under the Chief Minister’s Horticulture Mission Scheme.

    Procedure to Take Subsidy:-

  • For availing this scheme, farmers have to contact the Block Horticulture Office or District Horticulture Office. Note that, farmers need to register on the DBT portal to take advantage of selected schemes.
  • Farmers will be given the benefits of the scheme on first come first serve basis.
  • For more information like this, keep visiting. And follow us on Facebook, Instagram, and Twitter. Stay Connected & Stay Updated…!
  • source:-Krishihelpline

    Now You Can Easily Update Your Name in Aadhaar Card and Pan Card; Know How?

    The 12-digit number issued by UIDAI to citizens in the country is known as Aadhaar number and it is mainly used in banks, income tax identification, and public distribution system. It also acts as an address and ID proof. Whereas, the PAN card is a unique 10-digit identification number. While the Aadhaar card can be used as a proof of identity and place of residence, the PAN card helps the Income Tax Authority to keep track of all financial transactions. In such a situation, both of these are very important documents for us. Often people have to face problems due to the name being wrong in them. Your name can be corrected in the Aadhaar card and PAN card.
    How to correct your name in Aadhaar card:-
    To correct your name in the Aadhaar card, you have to go to the Aadhaar Enrollment Center and fill the Aadhaar Amendment Form. There, along with filling the correct information in the form, a copy of those documents will also have to be attached in which your correct names are recorded. After this, you have to pay Rs. 25 to 30 to update the information. Your name will be corrected after following this process.
    Follow these steps to correct your name in Aadhaar card: Visit an Aadhaar enrollment centre.
  • Fill out Aadhaar modification form.
  • Enter correct information in the form.
  • Attach documents with correct name and right spelling with this form.
  • Rs 25-30 have to be paid for updating the information with the amount varying as per location and centre.
  • How to correct your name on PAN card:
    If there is a mistake in the name of the PAN card, visit the National Securities Depository Limited website. Select the option of Correction in Existing PAN here. After this, select the category type. A copy of those documents will also have to be attached in which your correct names are recorded. After doing this, click on the Submit option. You will be charged a fee for all this. After which the updated PAN card will be sent to the registered address 45 days from the day of application.
    Follow these steps to correct your name in PAN card:-
  • Visit the website of National Securities Depository Limited.
  • Select option ‘Correction in Existing PAN’.
  • Choose category type
  • Attach documents with correct name and right spelling.
  • Click on Submit option.
  • A certain fee will be charged, amount of which is not disclosed.
  • Updated PAN card will be sent to the registered address in 45 days from the day of application.
  • source:-Krishihelpline

    EVENT:-

    FARMING EXPO-Hyderabad 2021

    Farming Expo is a great opportunity for the stakeholders of the agricultural sector to meet each other and will meet their needs. The best agricultural technologies, equipment and machinery, seeds and fertilizers, farming pests, pest control methods, farmer safety at the Farming Expo Equipment and practices, storage and packaging technologies, and allied industries on one platform. Starting operations in the year 2013, Media Day Marketing is a premier business exhibition company, which organizes B2B exhibitions and conferences with a competitive edge in the Indian market. Agriculture has been the backbone of the Indian economy since ages. After destroying the Indian sunbonnet along many rivers, the land in India provided very good land for agriculture and became the land of one of the oldest civilizations in the world. Being one of the world’s most densely populated countries, India’s share in agricultural production is also high and the region contributes about 18% of GDP. India is one of the top 10 agricultural exporting countries in the world and more than 50% of its work force is directly or indirectly involved in the agricultural sector.

    Venue:- Hitex Exhibition Center, Hydrabad
    Date:- 26-27-28 Feb 2021
    Website:- http://tradeshows.tradeindia.com/farmingexpo/

    source:-kissanhelpline

    SBI Integrates YONO Krishi with IFFCO eBazar; Farmers will Now be able to Buy High-Quality Farm Inputs, Agri Machinery Online

    With an aim to digitally empower its farmer customers and make them future ready, State Bank of India (SBI), country’s largest lender has facilitated the integration of YONO Krishi with IFFCO eBazar under its Mandi section. With this integration, SBI’s farmer customers can avail free home delivery of all farming related products in 27000+ Pin codes across the country from IFFCO eBazar portal. They can seamlessly order online – seeds, fertilizers, agri machinery, pesticides, organic products and various other farm products – with no minimum order value through IFFCO eBazar portal. More than 3 crore registered YONO customers can be benefited with the integration of YONO Krishi and IFFCO eBazar. It must be noted that IFFCO eBazar is a 100% owned subsidiary of IFFCO Limited. Through its online B2C platform IFFCO eBazar sells variety of agro products. The platform is available in 12 languages through App (both Playstore and AppStore) and Portal. MD (Retail & Digital Banking) of SBI, C. S. Setty said, “With the integration of IFFCO Bazar on YONO Krishi, customers will now be able to purchase the high-quality farm inputs and agri machinery online. This is another step towards fulfilling the vision of the government of doubling the farmer’s income by 2022. With a Digital-First approach, it is part of our continuous endeavor to provide innovative digital banking solutions to all our customers across the country.” YONO Krishi platform has been catering to all the farmers’ agricultural needs, from sowing to harvesting. Available in 10 vernacular languages, besides Hindi and English YONO Krishi is providing convenient and advanced farming experience to the customers. In less than 3 years, YONO has grown by leaps and bounds. It has witnessed over 65 million downloads with more than 30 million registered users. YONO has partnered with over 80 e-commerce players in more than 20 categories. SBI’s flagship banking and lifestyle platform – YONO is also tasting success in international markets like the UK and Mauritius.

    source:krishihelpline

    Download Krishi Dev Gyan Mobile App & Get All Information, Queries, Advice Related to Farming; Direct Link Inside

    Mobile App to for farmers: A special initiative has been taken by the subsidiary company of IFFCO, the leading cooperative fertilizer organization. This initiative has been taken to make the farming more profitable and environment friendly for the farmers. It will not only help farmers in agriculture, but also provide information related to it at the appropriate time.
    We are talking about the mobile app developed by the company. The app will provide appropriate information about farming to the farmers who will join this mobile app. This will be done through satellite and AI. Empowerment of farmers will be promoted through this app named ‘Krishi Dev Gyan Mobile App’.So let’s understand what this app is, how does it work & its special features.
    What is ‘Krishi Dev Gyan’ Mobile App?
    ‘Krishi Dev Gyan’ Mobile App is specially designed app to help farmers in agriculture. Satellite and AI will be used in this. Through this, farmers will be informed about their small and big farms. Along with this, the fertility of the soil and the lack or abundance of nutrients in it, weather conditions, need to use fertilizers, water, pesticides etc. will be told to the farmers.There are 2 types of equipment in ‘Krishi Dev Gyan’ Mobile App
    A tool will give the smallest details of 2 to 3 acres of farmland. If there is an outbreak of pests or diseases in a particular part of the field, farmers will be alerted through this. Apart from this, which medicine will be used and in which part of the farm for crop productivity will also be informed.
    The second device, can give similar information about the farm spread over 2 to 3 km. It is being told that the areas of most of the farmers’ fields are small and spread far and wide. With this, the situation of each farm is different. In such a situation, if the farmer has to get extensive information about a particular area, then with the help of IFFCO farmer, he can get subsidized equipment in the field.
    Equipment subsidized price:-
    The subsidized price of the first device has been kept at around Rs 15000, while the cost of the second device is around Rs 35000-40000. Through this, farmers can increase the quality of the crop by using the right technologies. It has been learned that the farmers of Gujarat were trying to produce cumin exportable for the last 4 years. After training and information by IFFCO farmers, farmers have been successful in growing export quality cumin in the year 2020.
    Feature of Krishi Dev Gyan ‘mobile app:-
  • This app collects the important data like the status, size, irrigation, variety of seeds, name of the crop, date of sowing etc.
  • Based on this data, agricultural scientists and experts give advice to farmers.
  • If a picture has been uploaded from the field, farmers are advised directly on their mobile number.
  • There will be a complete description of diseases and pests and their solutions.
  • Direct Link to download the app on your mobile.
    https://play.google.com/store/apps/details?id=com.krishidevgyaan&hl=en_SG

    source:krishihelpline